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Char Dil Char Rahen1959

Char Dil Char Rahen (1959): featured artwork

Introduction

Char Dil Char Rahen (1959), directed by Khwaja Ahmad Abbas, starred the two brothers Raj Kapoor and Shammi Kapoor, along with Ajit Khan, Meena Kumari, Nimmi, and Kumkum. Based on a novel of the same name, the film was a socially conscious narrative woven through the stories of three men waiting at a symbolic crossroads—for love, purpose, and redemption.
The plot follows Govinda (Raj Kapoor), Dilwar (Ajit), and Johnny (Shammi Kapoor), each awaiting their beloved. Govinda is forbidden to marry Chavi (Meena Kumari) because she belongs to a lower caste and is exiled from the village. Still hopeful, he waits for her at the crossroads. Dilwar rescues Pyari (Nimmi) from a Nawab, but she refuses to leave without her mother and eventually sets up a shop, waiting for him. Johnny, in love with Stella (Kumkum), is falsely accused by his boss (David) and imprisoned. After his release, he joins the others and starts a garage. The trio is later tasked by a union leader (Paidi Jairaj) with blasting a hill to build a road, adding a layer of metaphor to their stalled lives.
Released alongside major films like Navrang and Chirag Kahan Roshni Kahan, Char Dil Char Rahen underperformed at the Indian box office. Tensions during production—including Shammi Kapoor's refusal to shoot a song and other disputes—led director Abbas to swear off working with mainstream stars.
However, the film became a massive hit in the Soviet Union, drawing nearly 40 million viewers in 1962 and grossing an equivalent of ₹591 crore in 2016 terms, far surpassing its Indian earnings.
Anil Biswas's music, with lyrics by Sahir Ludhianvi, received acclaim. Memorable tracks include Kachhi Hai Umariya (Meena Kapoor), Nahi Kiya To Karke Dekh (Mukesh), and Kadam Kadam Se Dil Se Dil (Mukesh, Mahendra Kapoor, Meena Kapoor), along with several solos by Lata Mangeshkar.
चार दिल चार राहें (1959) का निर्देशन ख़्वाजा अहमद अब्बास ने किया था। इस फ़िल्म में असल ज़िन्दगी में एक-दूसरे के भाई राज कपूर और शम्मी कपूर पर्दे पर मुख्य भूमिकाएँ निभा रहे थे और उनके साथ अजीत, मीना कुमारी, निम्मी और कुमकुम भी प्रमुख किरदारों में थे। इसी नाम से लिखे गए उपन्यास पर आधारित इस फ़िल्म की कहानी भी ख़्वाजा अहमद अब्बास की दूसरी फ़िल्मों की तरह सामाजिक चेतना से ओत-प्रोत थी। इसमें तीन किरदारों की समांतर चलती कहानियों के ज़रिए जीवन में प्रेम, उसके उद्देश्य और मुक्ति की तलाश को ज़िन्दगी के एक प्रतीकात्मक चौराहे पर एक-दूसरे से मिलते दिखाया गया है।
फ़िल्म की कहानी गोविंदा (राज कपूर), दिलावर (अजीत) और जॉनी (शम्मी कपूर) के किरदारों के साथ आगे बढ़ती है। इन तीनों को अपनी-अपनी प्रेमिकाओं की प्रतीक्षा है। गोविंदा को तथाकथित निम्न जाति से आनेवाली लड़की छवि (मीना कुमारी) से प्यार है, लेकिन छवि को गाँव से निष्कासित कर दिया जाता है। लेकिन गोविन्दा अब भी आशावान है और चौराहे पर उसका इंतज़ार करता है। दिलावर एक नवाब के चंगुल से प्यारी (निम्मी) नामक लड़की को बचाता है। लेकिन प्यारी अपनी माँ को साथ लिए बिना उसके साथ जाने से मना कर देती है और उसके इंतज़ार में वहीं दुकान खोल लेती है। उसे आस है कि दिलावर एक दिन लौट आयेगा। इधर जॉनी को स्टेला (कुंकुम) से प्रेम है, लेकिन उसका बॉस (डेविड) उस पर झूठा इल्ज़ाम लगाकर उसे जेल भिजवा देता है। जेल से छूटने के बाद जॉनी दोनों दूसरे पुरुष किरदारों से मिलता है और उनके साथ मिलकर एक गैराज शुरू करता है। फिर बाद में एक यूनियन लीडर (जयराज) इन तीनों को एक पहाड़ी को धमाके से उड़ाकर सड़क बनाने का काम सौंपता है। उनको मिला यह काम जैसे उनके ठहरे हुए जीवनमार्ग का प्रतीक बन जाता है।
यह फ़िल्म जब रिलीज़ हुई, उसी साल व्ही शांताराम की नवरंग (1959) और देवेंद्र गोयल की चिराग कहाँ रोशनी कहाँ (1959) जैसी दूसरी बड़ी फ़िल्में भी रिलीज़ हुई थीं। चार दिल चार राहें भारत में टिकट खिड़की पर उम्मीद के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। फ़िल्म की शूटिंग के दौरान हुई तनातनी, जैसे शम्मी कपूर का एक गाना करने से मना करना और ऐसे ही दूसरे कुछ विवादों ने निर्देशक अब्बास को इस कदर निराश किया कि उन्होंने मुख्यधारा सिनेमा के सितारों के साथ फिर कभी काम न करने की कसम खा ली।
हालाँकि यह फ़िल्म सोवियत संघ में ज़बरदस्त हिट साबित हुई। वहाँ सन् 1962 में रिलीज़ के वक्त इसे लगभग 4 करोड़ लोगों ने देखा और 2016 की मुद्रास्फ़ीति दर के आधार पर मूल्यांकन करें तो रूस में इस फ़िल्म ने करीब 591 करोड़ रुपए के बराबर की कमाई की। यह फ़िल्म के भारत में कमाए पैसों से भी कहीं ज़्यादा की कमाई थी।
इस फ़िल्म के लिए संगीत अनिल बिस्वास ने तैयार किया था और इसके गीतों के बोल साहिर लुधियानवी ने लिखे थे। फ़िल्म के गीतों को खूब सराहना मिली। इस फ़िल्म के यादगार गीतों में मीना कपूर का गाया “कच्ची है उमरिया”, मुकेश का गाया “नहीं किया तो करके देख” और मुकेश, महेंद्र कपूर एवं मीना कपूर का गाया “कदम कदम से दिल से दिल” याद किये जाते हैं। इसके साथ फ़िल्म में लता मंगेशकर के गाए कुछ अविस्मरणीय एकल गीत भी थे, जिन्हें चाहनेवाले आज भी याद करते हैं।
Ramachandra (ii) (Cinematographer), Char Dil Char Rahen, 1959 | Photographic Still | CinemaEducation | 00884717
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