Introduction
The film featured Anil Kapoor and Rati Agnihotri in key roles, with Dilip Kumar delivering a powerful performance. Kapoor's role was initially offered to Amitabh Bachchan and then to Kamal Haasan, but both declined.
In Mashaal, Vinod Kumar (Dilip Kumar) is a law-abiding citizen who runs a newspaper, Mashaal, exposing societal ills. He tries to reform a black marketeer, Raja (Anil Kapoor), by guiding him toward journalism. However, as Vinod battles gangster Vardhan (Amrish Puri), Vardhan retaliates, destroying Vinod's life—evicting him and his wife Sudha (Waheeda Rehman), and burning down his press. One of the film's most emotional scenes shows the homeless couple wandering through a desolate area during a city-wide bandh. Sudha, suffering from illness, collapses, and Vinod desperately cries, "Ae bhai, koi hai?" Rehman's portrayal of Sudha remains one of the most poignant moments in the film.
Dilip Kumar shared in his autobiography how he drew from personal losses, including the death of his father, to portray Vinod's anguish. The film's offbeat music, composed by Hridayanath Mangeshkar, featured popular tracks like Zindagi Aa Raha Hoon Main by Kishore Kumar; Mujhe Tum Yaad Karnaa, by Lata Mangeshkar and Kishore Kumar.
Despite star power and emotional depth, Mashaal was a commercial failure, earning only 25 million rupees against a budget of 29 million. Anil Kapoor won Filmfare's Best Supporting Actor award for his role as Raja.
फ़िल्म में युवा जोड़े की दूसरी मुख्य भूमिकाएँ अनिल कपूर और रति अग्निहोत्री ने निभाई थीं। पर मशाल को दिलीप कुमार के दमदार अभिनय के लिए सबसे ज़्यादा याद किया जाता है। फ़िल्म में जो भूमिका अनिल कपूर ने निभाई है, पहले वो अमिताभ बच्चन और फिर कमल हासन को ऑफर की गई थी, लेकिन दोनों ने मना कर दिया। फ़िल्म में दिलीप कुमार ने कानून के शासन में विश्वास रखनेवाले ऐसे नागरिक विनोद कुमार की भूमिका निभाई है, जो सामाजिक बुराइयों का पर्दाफ़ाश करने के लिए अपने अख़बार 'मशाल' का इस्तेमाल करता है। विनोद कालाबाजारी के चंगुल में फंसे नौजवान राजा (अनिल कपूर) को सुधारने के लिए उसे पत्रकारित की दुनिया में लेकर आता है। पर विनोद जब अपने अखबार 'मशाल' के माध्यम से अपराध सरगना वरधान (अमरीश पुरी) के खिलाफ़ मोर्चा खोलता है, वरधान उसे बर्बाद करने पर तुल जाता है। वो विनोद की जिन्दगी में तबाही का सैलाब खड़ा कर देता है। विनोद और उसकी पत्नी सुधा (वहीदा रहमान) को घर से बेदखल कर दिया जाता है, उनकी प्रिंटिंग प्रेस तक जला दी जाती है। फ़िल्म का सबसे मार्मिक दृश्यो है जहाँ ये बेघर वृद्ध जोड़ा बंद के दौरान शहर की सुनसान सड़कों पर मदद की गुहार लगाता भटक रहा है। बीमार सुधा बेहोश हो जाती है और विनोद हताश होकर सड़कों पर पागलों की तरह चिल्लाता है, “ऐ भाई, कोई है?” सुधा की भूमिका में वहीदा रहमान और विनोद की भूमिका में दिलीप कुमार का अभिनय यहाँफ़िल्म के सबसे करुण और मार्मिक क्षणों में से एक है।
दिलीप कुमार ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि कैसे उन्होंने मशाल में विनोद के किरदार की भीतरी पीड़ा को पर्दे पर ज़िन्दा करने के लिए अपने निजी जीवन की त्रासद घटनाओं की स्मृति का इस्तेमाल किया था, जिनमें उनके पिता की मृत्यु भी शामिल थी। हृदयनाथ मंगेशकर द्वारा रचा फ़िल्म का संगीत उस दौर के मुख्यधारा सिनेमा में बदलाव की बयार की तरह महसूस होता है। किशोर कुमार का गाया “ज़िन्दगी, आ रहा हूँ मैं” और लता मंगेशकर, किशोर कुमार का गाया “मुझे तुम याद करना” जैसे गीत गुणी सिनेप्रेमियों के बीच बहुत सराहे गए।
सितारा अभिनेताओं की मौजूदगी और कथानक की मज़बूत भावनात्मक गहराई के बावजूद मशाल को व्यावसायिक असफलता का सामना करना पड़ा। टिकट खिड़की पर यह फ़िल्म अपनी लागत जितना पैसा भी नहीं कमा पाई। हाँ, राजा की सहायक भूमिका के लिए अनिल कपूर ने अगले साल फ़िल्मफ़ेयर का सर्वश्रेष्ठ
सहायक अभिनेता का पुरस्कार जीता।