Introduction
The story revolves around a long-standing blood feud between two clan chiefs: Veer Singh (played by Dilip Kumar) and his rival Rajeshwar Singh Thakur (played by Raaj Kumar). This feud has persisted for decades, but it takes a new turn when their grandchildren, Radha Singh Thakur (Manisha Koirala) and Vasudev Singh (Vivek Mushran), fall in love. This conflict echoes the themes of Shakespeare's Romeo and Juliet, with Anupam Kher's character, Mandhaari, acting as a parallel to Friar Laurence.
The film's music was composed by the legendary duo Laxmikant-Pyarelal, with lyrics by Anand Bakshi. Songs like Ilu Ilu, sung by Kavita Krishnamurthy, Udit Narayan, Sukhwinder Singh, and Manhar Udhas, and Imli Ka Boota, performed by Mohammed Aziz, Sudesh Bhosle, and later in a different version by Sadhana Sargam, Mohammed Aziz, and Udit Narayan, became cult classics. These tracks remain popular with audiences to this day.
Saudagar was a commercial success, running for 25 weeks (a "silver jubilee") in theaters across India. It became the third highest-grossing Indian film of 1991 and was among the top 10 highest-grossing films of the 1990s. The film earned eight nominations at the 37th Filmfare Awards, winning two—Best Director for Subhash Ghai and Best Editing for Waman Bhonsle and Gurudutt Shirali.
For Dilip Kumar, Saudagar was his penultimate film and his final box-office hit before his death in 2021.
फ़िल्म की कहानी खानदानों के बीच पीढ़ियों से चले आ रही खूनी अदावत के इर्द-गिर्द घूमती है। एक ओर वीर सिंह (दिलीप कुमार) का खानदान है तो दूसरी ओर ठाकुर राजेश्वर सिंह (राज कुमार) का। बचपन के दोस्तों के बीच छिड़ी इस पीढ़ियों की जंग तब नया मोड़ लेती है जब इन दोनों खानदानों के मुखियाओं के पोते-पोती राधा (मनीषा कोइराला) और वासु (विवेक मुश्रान) एक दूसरे से प्यार कर बैठते हैं।
फ़िल्म का यह खानदानों की दुश्मनी वाला कथानक शेक्सपियर के नाटक 'रोमियो एंड जूलियट' की कहानी से कुछ हद तक प्रेरित है और फ़िल्म में अनुपम खेर का निभाया मंधारी का चरित्र नाटक के चरित्र 'फ्रायर लॉरेंस' से बहुत मिलता है।
फिल्म में संगीत महान जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था और गीतों के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे। फ़िल्म में कविता कृष्णमूर्ति, उदित नारायण, सुखविंदर सिंह और मनहर उधास का गाया "इलू इलू" गीत और मोहम्मद अज़ीज़, सुदेश भोंसले का गाया "इमली का बूटा" तो क्लासिक गीत बन गए और खूब पसन्द किए गए। “इमली का बूटा” गीत का एक दूसरा रूप फ़िल्म में साधना सरगम, मोहम्मद अज़ीज़ और उदित नारायण की आवाज़ में भी था। आज भी ये गीत दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।
सौदागर को बड़ी व्यावसायिक सफलता मिली। पूरे भारत के कई सिनेमाघरों में यह 25 हफ़्ते से ज़्यादा चली जिसे 'सिल्वर जुबली' कहते हैं। सौदागर साल 1991 की तीसरी सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फ़िल्म थी और यह नब्बे के दशक की 10 सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों में भी शामिल रही। इस फ़िल्म ने सैंतीसवें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों में आठ नामांकन हासिल किए और इसको दो श्रेणियों में जीत मिली। सुभाष घई को निर्देशन के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला और फ़िल्म के संपादन के लिए वामन भोंसले और गुरुदत्त शिराली ने सर्वश्रेष्ठ संपादक का पुरस्कार जीता।
दिलीप कुमार के सिनेमाई करियर की सौदागर अंतिम से पहली फ़िल्म थी पर उनकी व्यावसायिक रूप से सफल आखिरी फ़िल्म यही साबित हुई। साल 2021 में निधन से पहले उनकी एक ही और फ़िल्म क़िला (1998) रिलीज़ हुई। इस व्यावसायिक रूप से असफल रही फ़िल्म में दिलीप कुमार की दोहरी भूमिका थी, पहली दुष्ट ज़मींदार की जिसकी हत्या कर दी जाती है और दूसरी उसके जुड़वाँ भाई की जो इस हत्या का मुकदमा सुननेवाला न्यायाधीश है।