Dulhan Wahi Jo Piya Man Bhaaye1977
Introduction
The film was released at a time when Hindi cinema was undergoing a transition. Romance, epitomized by superstar Rajesh Khanna, was gradually being replaced by action heroes. Additionally, Manmohan Desai's popular "lost-and-found" theme was enjoying a surprising longevity, and multi-starrers were seen as a safe bet for producers. Meanwhile, Amitabh Bachchan's presence guaranteed box-office success, while stars like Rishi Kapoor, Dharmendra, Jeetendra, and Vinod Khanna continued to attract young audiences. In this context, Barjatya's family-oriented films, with their emphasis on clean entertainment, songs, dances, and moral values, provided a refreshing alternative. Dulhan Wahi Jo Piya Man Bhaye emerged as a breath of fresh air during this era.
The film's music, composed and written by Ravindra Jain, became a sensation. Jain, who introduced the relatively unknown voice of Hemlata, made a major impact with his fresh and lilting compositions. Hit songs such as "Le Toh Aaye Ho Hame Sapno" (Sajna-O-Sajna), "Khushiyan Hi Khushiyan", "Mangal Bhawan Amangal Hari" (Ramayan – Chaupaiyan), "Puravaiyaa Ke Jhonke Aaye", and the Rafi-Hemlata duet "Baj Jayega" became runaway successes.
The film's storyline closely mirrors that of Tamasha (1978) and the 1941 Hollywood film It Started with Eve. It was later remade in Tamil as Marumagal.
The film's lead stars, Prem Krishen (son of actor Premnath and actress Bina Rai) and Rameshwari (an FTII alumna), became overnight sensations with its success. The supporting cast included notable actors such as Madan Puri, Jagdeep, Iftekhar, and Shashikala. Another key highlight of the film was its music, with Ravindra Jain also making his singing debut with the track "Achra Mein Phoolwa Leke".
Dulhan Wahi Jo Piya Man Bhaye earned several accolades, including the Filmfare Best Dialogue Award for Vrajendra Gaur and the Filmfare Best Screenplay Award for Lekh Tandon, Vrajendra Gaur and Madhusudan Kalekar.
यह फ़िल्म एक ऐसे वक्त में रिलीज़ हुई थी, जब हिन्दी सिनेमा बदलाव के दौर से गुज़र रहा था। जहाँ एक ओर सुपरस्टार राजेश खन्ना की रोमांटिक छवि की लोकप्रियता घट रही थी, वहीं दूसरी ओर यह दौर गुस्सैल एक्शन नायकों के वर्चस्व की ओर बढ़ रहा था। यही दौर था जब निर्देशक मनमोहन देसाई की मशहूर 'परिवारों का बिछड़ना और फिर उनका पुनर्मिलन' जैसी कहानियों पर बनी फ़िल्में लोकप्रिय बनी हुई थीं और बहु-नायकों वाली कहानियाँ निर्माताओं को सबसे सुरक्षित विकल्प लगती थीं। अमिताभ बच्चन के 'एंग्री यंग मैन' का उदय हो चुका था और उनकी फ़िल्म में मौजूदगी व्यावसायिक सफलता की गारंटी मानी जाने लगी थी। उस दौर के ऋषि कपूर, धर्मेंद्र, जितेंद्र और विनोद खन्ना जैसे दूसरे सितारे भी युवा दर्शकों को आकर्षित कर रहे थे। पर इसी एक्शन की भरमार वाले दौर में बड़जात्या खानदान की पारिवारिक मूल्यों पर आधारित कहानियों पर निर्मित फ़िल्में जिनमें साफ़-सुथरा मनोरंजन हो, सुगम गीत-संगीत हो और नैतिक मूल्यों पर ज़ोर दिया गया हो, किसी ताज़ा हवा के झोंके की तरह सामने आईं। दुल्हन वही जो पिया मन भाये को इस 'एंग्री यंग मैन' सिनेमा वाले दौर में एक खुशनुमा बदलाव की तरह देखा जा सकता है।
इस फ़िल्म में संगीत रवींद्र जैन ने दिया था और उन्होंने ही इसके गीत भी लिखे थे। इस फ़िल्म ने सिनेमाई संगीत की दुनिया में एक नई सनसनी पैदा कर दी। जैन ने इस फ़िल्म के माध्यम से एक नई गायिका हेमलता की अब तक अनसुनी आवाज़ को प्रस्तुत किया, जिसके स्वर की कोमल ताज़गी को श्रोताओं ने बहुत पसन्द किया। "ले तो आए हो हमें सपनों के गाँव में", "खुशियाँ ही खुशियाँ", "मंगल भवन अमंगल हारी", "पुरवैया के झोंके आए" और "बज जाएगा बाजा" जैसे फ़िल्म के गाने बहुत लोकप्रिय हुए।
इस फ़िल्म की कहानी 1978 में रिलीज़ हुई एक दूसरी फ़िल्म तमाशा से और 1941 में हॉलीवुड में बनी चर्चित फ़िल्म इट स्टार्टेड विद ईव से काफ़ी मिलती-जुलती है। बाद में इस फ़िल्म का तमिल भाषा में मारुमागल शीर्षक से रीमेक भी बनाया गया।
फ़िल्म के मुख्य किरदारों को निभाने वाले, अभिनेता प्रेमनाथ और अभिनेत्री बीना राय के पुत्र नौजवान अभिनेता प्रेम कृष्ण और एफ़टीआईआई पूना की पूर्व छात्रा रामेश्वरी इस फ़िल्म की सफलता के साथ रातोंरात सितारा हैसियत पर पहुँच गए। फ़िल्म में सहायक कलाकारों की भूमिका में मदन पुरी, जगदीप, इफ्तेख़ार और शशिकला जैसे नामी अभिनेता शामिल थे। फ़िल्म का एक अन्य प्रमुख आकर्षण रवींद्र जैन का खुद अपनी आवाज़ में गाया अचरा में फुलवा ले के गीत था, जिसके साथ उन्होंने गायकी में भी अपनी पारी की शुरुआत की।
दुल्हन वही जो पिया मन भाये को कई पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया जिनमें फ़िल्म के संवाद लेखक व्रजेंद्र गौड़ को मिला फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार और लेख टंडन, व्रजेंद्र गौड़ तथा मधुसूदन कालेकर को संयुक्त रूप से मिला फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पटकथा पुरस्कार शामिल है। आज भी यह फ़िल्म 'राजश्री प्रोडक्शंस' की सबसे चाही गई फ़िल्मों में से एक मानी जाती है और इसका मधुर संगीत और साफ़-सुधरा पारिवारिक मनोरंजन इसे अपने दौर की दूसरी फ़िल्मों के बीच अलग ही आभा देता है।