Dil Deke Dekho1959
Introduction
The film also played a pivotal role in reshaping Shammi Kapoor's image, transforming him from a serious actor into a comedic, dancing hero. It also marked the debut of music composer Usha Khanna, who went on to have a successful career.
Dil Deke Dekho was a box-office hit, and the trio of Hussain, Kapoor, and Parekh would later reunite for the successful Teesri Manzil. Hussain would go on to cast Parekh in five more of his films. Although Kapoor initially wanted Waheeda Rehman or Sadhana as his leading lady, Asha Parekh was already signed by the producer, and both she and Kapoor hit it off throughout the filming process making their onscreen chemistry great.
Usha Khanna's music was another highlight of the film, with songs becoming superhits. Tracks like “Rahi Mil Gaye Rahon Mein” and “Hum Aur Tum Aur Yeh” sung by Mohammed Rafi, and duets like “Bade Hai Dil Ke Kale”, “Yahi Neeli Si Aankhonwale”, “Yaar Chulbula Hai”, and “Pyar Ki Kasam Hai” (sung by Rafi and Asha Bhosle), were widely appreciated. The film not only cemented the popularity of its lead pair—Parekh and Kapoor—but also solidified Rafi and Bhosle as one of the most iconic playback duos in Bollywood.
यह फ़िल्म शम्मी कपूर की नायकीय पारी में भी एक मील का पत्थर गिनी जा सकती है। इसके साथ शम्मी कपूर ने अपनी गंभीर अभिनेता की छवि को तोड़ा और एक मज़ाहिया और डांसिंग हीरो की छवि की ओर मज़बूती से बढ़ गए। साथ में यह फ़िल्म हिन्दी सिनेमा में उषा खन्ना के संगीत निर्देशक करियर की शुरुआत के लिए भी याद की जाती है। हिन्दी सिनेमा में स्त्री संगीत निर्देशक यूँ तो बहुत कम रही हैं, पर उषा खन्ना इसका मज़बूत अपवाद रहीं और आगे चलकर एक कामयाब संगीतकार बनीं।
दिल देके देखो टिकट खिड़की पर कामयाब रही और इसमें बनी नासिर हुसैन, शम्मी कपूर और आशा पारेख की तिकड़ी ने ही बाद में तीसरी मंज़िल (1966) जैसी यादगार फ़िल्म दी। निर्देशक नासिर हुसैन ने इसके बाद अपनी पाँच और फिल्मों में नायिका के बतौर आशा पारेख को चुना। हालाँकि फ़िल्म के नायक शम्मी कपूर पहले वहीदा रहमान या साधना को इस फ़िल्म हीरोइन के रूप में चाहते थे, लेकिन निर्माता पहले ही आशा पारेख को इस भूमिका के लिए ले चुके थे। फिर फ़िल्म की शूटिंग के दौरान शम्मी कपूर और आशा पारेख के बीच खूब महफ़िल जमी और उनकी शानदार जुगलबन्दी सिनेमा के पर्दे पर भी बेहतरीन रही।
दिल देके देखो का एक और मुख्य आकर्षण उषा खन्ना का संगीत था। इसके गाने बहुत कामयाब हुए और आज भी बेहद लोकप्रिय हैं। गायक मोहम्मद रफ़ी के गाए "राही मिल गए राहों में" और "हम और तुम और ये समाँ" जैसे गानों को खूब सराहना मिली। इसके अलावा मोहम्मद रफ़ी और आशा भोंसले के फ़िल्म के लिए गाए युगल गीतों जैसे "बड़े हैं दिल के काले", "यही नीली-सी आँखों वाले", "यार चुलबुला है" और "प्यार की कसम है" को भी बड़ी लोकप्रियता मिली। इस फ़िल्म ने न सिर्फ़ आशा पारेख और शम्मी कपूर की सिनेमाई जोड़ी को हिन्दी सिनेमा की लोकप्रिय जोड़ी बनाया, इसने मोहम्मद रफ़ी और आशा भोंसले को भी गज़ब के तालमेल वाली एक यादगार गायक जोड़ी के रूप में स्थापित कर दिया।