Introduction
Bhansali was deeply inspired by the novel, having read it a second time before embarking on the project in 1999. He worked on the screenplay with Prakash Ranjit Kapadia, and production began in 2000, with extensive research into British Raj-era architecture, led by Nitin Chandrakant Desai. Filming took place across various locations, including Bikaner and Film City, and was completed in April 2002.
The film's soundtrack remains iconic, with the legendary Kathak guru Birju Maharaj choreographing the timeless “Kahe chhede mohe.” Alongside other choreographers, including Saroj Khan and Vaibhavi Merchant, the dance sequences are unforgettable. The music, composed by Ismail Darbar and lyrics by Nusrat Badr and Sameer Anjaan, created a lasting impact, with vocal performances from legends like Shreya Ghoshal, whose career was launched through this film. Devdas premiered at the 2002 Cannes Film Festival on May 23, 2002.
Despite controversies revolving around Bhansali taking cinematic liberty in depicting the classic characters, Devdas remains a cinematic masterpiece, blending traditional Indian elements with Bhansali's grand visionary direction.
फ़िल्म की कहानी लंदन से वकालत पढ़कर लौटे एक समृद्ध परिवार के उत्तराधिकारी नौजवान देवदास के बारे में है जो अपनी बचपन की सखी पारो से विवाह करना चाहता है। पर उसका परिवार इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करता और पारो उससे दूर हो जाती है। देवदास शराब की लत में डूब जाता है और एक नाचनेवाली तवायफ़ चँद्रमुखी के दामन में दिलासा खोजने लगता है। पर पारो को वो भूल नहीं पाता। फ़िल्म की कहानी प्रेम, वियोग और हताशा की विविध मंज़िलों को देवदास, पारो और चंद्रमुखी के बीच पनपे प्रेम त्रिकोण के माध्यम से तलाश करती है। इन किरदारों के आकर्षण ने सिनेमा देखनेवाली कितनी ही पीढ़ियों को अपने मोहपाश में बाँधे रखा है।
भंसाली इस उपन्यास से इतनी गहराई तक प्रभावित थे कि उन्होंने 1999 में इस फ़िल्म को बनाने का निश्चय करने से पहले इसे दो बार पढ़ा था। फ़िल्म की पटकथा पर उन्होंने प्रकाश रंजीत कपाड़िया के साथ काम किया और वर्ष 2000 में फ़िल्म का निर्माण शुरू हुआ। फ़िल्म के दृश्यों में जान लाने के लिए ब्रिटिश दौर की स्थापत्य कला पर गहन शोध किया गया और फ़िल्म के कला निर्देशक नितिन चंद्रकांत देसाई ने इसकी अगुआई की। फ़िल्म की शूटिंग बीकानेर और फ़िल्म सिटी सहित कई जगहों पर की गई और अप्रैल 2002 में इसकी शूटिंग पूरी हुई।
इस फ़िल्म के गीत-संगीत और नृत्यों को बहुत लोकप्रियता मिली। प्रसिद्ध कथक गुरु पंडित बिरजू महाराज द्वारा संगीतबद्ध और निर्देशित यादगार गीत “काहे छेड़, छेड़ मोहे” तो भुलाया नहीं जा सकता। फ़िल्म के दूसरे गीत नृत्य निर्देशक सरोज खान और वैभवी मर्चेंट जैसे नामी कलाकारों के रचे थे जिन्होंने यादगार नृत्य प्रसंगों को गढ़ने में योगदान दिया। फ़िल्म में इस्माइल दरबार संगीत था और गीत नुसरत बद्र, समीर अंजान ने लिखे थे। दर्शकों पर इन गीतों ने गहरा प्रभाव छोड़ा और श्रेया घोषाल जैसी उभरती गायिका इसी फ़िल्म के बाद फ़िल्मउद्योग में स्थापित नाम बन गईं।
हालाँकि भंसाली ने मूल कथा से जो छेडछाड़ की और जिस तरह किरदारों के पारंपरिक चित्रण में सिनेमाई स्वतंत्रता ली उसे लेकर विवाद हुए, लेकिन देवदास आज भी एक भव्य और विलक्षण सिनेमाई कृति बनी हुई है। भंसाली की देवदास पारंपरिक भारतीय तत्वों को उनकी भव्यता वाली शैली के साथ जोड़नेवाली यादगार फ़िल्म है।