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Introduction

Chittor Vijay (1947) directed by Mohan Sinha and starring Raj Kapoor, Madhubala, and Gulnar in the lead roles, is a historical romance centred around a noble and courageous prince. Living peacefully in his kingdom, he falls in love with a kind-hearted girl from among his people. Their budding romance takes a dramatic turn when an ambitious and malevolent king from a rival kingdom sets his sights on both the throne and the prince's beloved, sparking a serious conflict.
Despite its compelling premise and notable cast, Chittor Vijay was not a commercial success. It was released the same year as Raj Kapoor's breakout film Neel Kamal, along with several other early projects featuring Kapoor—all of which struggled at the box office. The film earned approximately ₹12,00,000 and marked part of Kapoor's challenging early career in cinema.
Though it didn't fare well commercially, Chittor Vijay remains noteworthy within the historical genre for its portrayal of valour and love. The film references the legendary victory at Chittor, symbolized by the Vijay Stambh (Victory Tower), which today stands as a prominent tourist attraction and historical monument.
चित्तौड़ विजय (1947) के निर्देशक मोहन सिन्हा थे। इस फ़िल्म में राज कपूर, मधुबाला तथा गुलनार ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाई थीं। यह फ़िल्म एक ऐतिहासिक प्रेम कथा है। कहानी के केंद्र में एक जाँबाज़ और दरियादिल राजकुमार है। अमन और चैन के साथ अपने राज्य में जीवन व्यतीत करते हुए इस राजकुमार को अपने ही राज्य की एक आम लड़की से प्रेम हो जाता है। लड़की भी स्वभाव से दयालु और परोपकारी है। उनका यह प्रेम धीरे-धीरे परवान चढ़ता है। लेकिन तभी प्रतिद्वंद्वी राज्य का लालची और क्रूर राजा उसके सिंहासन पर कब्ज़ा करने के उद्देश्य से आ धमकता है और राजकुमार की प्रेमिका पर अपनी नजरें टिका देता है। यहीं से इन दोनों राजाओं के बीच एक भारी टकराव की शुरुआत होती है।
हालाँकि इस फ़िल्म की कहानी प्रभावशाली थी और उम्दा कलाकारों की टोली इसके साथ जुड़ी थी, पर चित्तौड़ विजय को व्यावसायिक सफलता नहीं मिली। यह फ़िल्म उसी वर्ष रिलीज़ हुई थी जिस वर्ष राज कपूर की पहली बड़ी हिट नील कमल भी आई थी। उस साल और उसके आस-पास राज कपूर की करियर की शुरुआत में साइन की कई फिल्में साथ प्रदर्शित हुईं, लेकिन उनमें से अधिकांश को टिकट खिड़की पर संघर्ष करना पड़ा। इस फ़िल्म ने लगभग 12 लाख रुपए की कमाई की और यह उन फ़िल्मों की सूची का हिस्सा बनी जो अपने सिनेमाई करियर के शुरुआती चुनौतीपूर्ण दौर में राज कपूर ने की थीं।
हालाँकि यह फ़िल्म व्यवसायिक रूप से कामयाब नहीं रही, पर चित्तौड़ विजय ऐतिहासिक विधा फ़िल्म में प्रेम और वीरता को जिस तरह साथ रखकर दिखाती है यह उसे इस विधा की एक रास्ता बनानेवाली फ़िल्म बनाता है। फ़िल्म में चित्तौड़ के प्रसिद्ध 'विजय स्तंभ' को उस ऐतिहासिक विजय के प्रतीक के बतौर पेश किया गया है। आज भी यह स्मारक और किला राजस्थान के एक प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विद्यमान है। तक़रीबन दो दशक बाद विजय आनंद के निर्देशन में बनी देव आनंद की यादगार फ़िल्म गाइड (1965) में लता मंगेशकर के गाये और वहीदा रहमान पर फ़िल्माए अमर गीत आज फिर जीने की तमन्ना है में यही 'विजय स्तंभ' और चित्तौड़ का ऐतिहासिक किला अपने पूरे वैभव के साथ पृष्ठभूमि में नज़र आता है।

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