Introduction
Initially, the role of Aarti Devi was offered to actress Vyjayanthimala, but she declined, citing her discomfort with the physical resemblance between her character and Indira Gandhi. Years later, Vyjayanthimala expressed regret about turning down Aandhi, alongside her other missed opportunities in Mr. and Mrs. 55 (1955) and Bandini (1963). She confessed that her admiration for Indira Gandhi made her hesitate at the time. Gulzar also mentioned that only yesteryear actress Veena, with her stateliness, would have suited the role. Another actress, Nanda, who was known for taking on challenging roles sparingly, revealed she would have gladly accepted the lead role in the film.
Beyond the compelling performances by Sen and Kumar and Gulzar's delicate handling of a sensitive subject, Aandhi is celebrated for its exceptional music. The songs, composed by Rahul Dev Burman and written by Gulzar, with vocals by Kishore Kumar and Lata Mangeshkar, are unforgettable. The Lata-Kishore duets Tere Bina Zindagi Se, Is Mod Se Jate Hain, and Tum Aa Gaye Ho Noor Aa Gaya remain immortal hits, continuously adored by listeners.
Though the film received several Filmfare nominations, it was only Gulzar who won the Best Film Critics Award, while Sanjeev Kumar took home the Best Actor Award.
आंधी की कहानी एक विवाहित लेकिन बाद में अलग हो गए दम्पति की संयोगवश हुई मुलाकात के इर्द-गिर्द घूमती है। बड़ी राजनीतिज्ञ बन चुकी आरती देवी शहर में चुनाव प्रचार के दौरान उसी होटल में रुकती हैं, जहाँ अब उनके अलग हो चुके पति मैनेजर हैं। गुलज़ार और फ़िल्म से जुड़े प्रमुख लोगों के स्पष्टीकरण देने के बावजूद फ़िल्म राजनीतिक विवादों में फंस गई। यहाँ तक कि विवाद से बचने के लिए फ़िल्म का कुछ हिस्सा दोबारा शूट करना पड़ा।
लेकिन 1975 में फ़िल्म की रिलीज़ के कुछ ही बाद आंधी को चुनावी 'आदर्श आचार संहिता' के उल्लंघन का आरोप लगाकर प्रतिबंधित कर दिया गया। दावा किया गया था कि यह फ़िल्म सत्ताधारी पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा सकती है। 25 जून, 1975 को देश में आपातकाल की घोषणा होने के बाद फ़िल्म पर प्रतिबंध को और बढ़ा दिया गया। पर यह भी मानना होगा कि इस प्रतिबंध ने आंधी को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया। फ़िल्म की कहानी लेखक कमलेश्वर ने लिखी है, जबकि इसकी पटकथा गुलज़ार ने कमलेश्वर और भूषण बनमाली के साथ मिलकर तैयार की थी। सन् 1977 के ऐतिहासिक आम चुनावों में इंदिरा गांधी को बड़ी करारी हार मिली और जनता पार्टी सरकार सत्ता में आई, उसके बाद फ़िल्म पर प्रतिबंध समाप्त हुआ और फिर तो फ़िल्म को दूरदर्शन पर भी दिखाया गया। बाद में खुद गुलज़ार ने यह स्वीकार किया कि फ़िल्म इंदिरा गांधी के किरदार से प्रेरित थी। अभिनेता संजीव कुमार ने भी कहा कि उनके किरदार के लिए संकेत फ़िरोज़ गांधी के व्यक्तित्व से लिए गए थे।
पहले आरती देवी का किरदार अभिनेत्री वैजयंतीमाला को ऑफर किया गया था, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इसे ठुकरा दिया कि वे फ़िल्म की मुख्य किरदार और इंदिरा गांधी के बीच हाव-भाव और शारीरिक साम्य को लेकर सहज नहीं हैं। हालांकि कई सालों बाद वैजयंतीमाला ने जिन फ़िल्मों को छोड़ने के अपने फ़ैसलों पर अफ़सोस ज़ाहिर किया, उनमें मिस्टर एंड मिसेज़ '55 (1955) और बंदिनी (1963) जैसी फ़िल्मों के साथ आंधी का भी नाम था। उन्होंने स्वीकार किया था कि आंधी के लिए हाँ करने से हिचकने के पीछे वजह इंदिरा गांधी के प्रति उनके मन का आदरभाव था। गुलज़ार ने यह भी बताया था कि उनकी नज़र में सिर्फ़ पूर्व अभिनेत्री वीना ही थीं जो अपनी समूची गरिमा के साथ इस भूमिका के लिए उपयुक्त होतीं। जब चुनिंदा लेकिन चुनौतीपूर्ण किरदारों को निभाने में आगे रहीं अभिनेत्री नंदा से पूछा गया तो उन्होंने यह खुलासा किया था कि मौका मिलने पर वे इस भूमिका को खुशी-खुशी निभातीं।
सुचित्रा सेन और संजीव कुमार के प्रभावशाली अभिनय से सजी और गुलज़ार की नाज़ुकबयानी से सँवरी आंधी अपने अविस्मरणीय संगीत के लिए भी याद की जाती है। फ़िल्म में संगीत राहुल देव बर्मन का था और गीत खुद गुलज़ार के लिखे थे। लता मंगेशकर और किशोर कुमार के गाए युगल गीत "तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा", "इस मोड़ से जाते हैं" और "तुम आ गए हो, नूर आ गया है" आज भी यादगार बने हुए हैं और कितने ही सुननेवालों की नाज़ुक धड़कनों के करीब रहते हैं।
आंधी को फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों में कई नामांकन मिले, लेकिन आखिर में पुरस्कार सिर्फ़ सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म (क्रिटिक्स) के लिए निर्देशक गुलज़ार ने और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए संजीव कुमार ने जीता।