Paisa1957
Introduction
In addition to Kapoor, the cast included Ravindra Kapoor, Kuldip Kaur, and Sudesh Kumar. The film's music was composed by the legendary O. P. Nayyar, with playback contributions from a host of renowned singers including Geeta Dutt, Mohammed Rafi, Asha Bhosle, Shamshad Begum, Mubarak Begum, and Indira Wadkar. Notable songs include Deep Jalenge Deep by Geeta Dutt, Paisa Hi Rang Roop Hai by Rafi, Apne Babul Ka Ghar Chhod Ke Beti by Shamshad Begum and chorus, and Khatma Dil Khair Apna Ho Chuka by Mubarak Begum.
Sources vary on the exact number of songs in the film. Some suggest three solos each by Geeta Dutt and Asha Bhosle, though music platforms list different track counts, likely reflecting discrepancies in surviving recordings.
While Paisa's commercial performance remains unclear—some accounts mention that Kapoor lost his voice during production and scaled back his theatre and film work—there's no definitive record of its box office fate. Its release coincided with Guru Dutt's acclaimed Pyaasa (1957), a film often discussed in contrast due to its enduring success and cultural impact. In comparison, Paisa remains a lesser-known but thematically rich entry in Kapoor's career.
पृथ्वीराज कपूर के साथ इस फ़िल्म में रवीन्द्र कपूर, कुलदीप कौर और सुदेश कुमार जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाएँ निभा रहे थे। इस फ़िल्म के लिए संगीत प्रसिद्ध संगीतकार ओ. पी. नैय्यर ने तैयार किया था और इसके गीतों को गीता दत्त, मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले, शमशाद बेग़म, मुबारक बेग़म और इंदिरा वाडकर जैसे उस दौर के प्रसिद्ध गायकों ने स्वर दिए थे। इस फ़िल्म के कुछ यादगार गीतों में गीता दत्त का गाया “दीप जलेंगे दीप”, मौहम्मद रफ़ी का गाया “पैसा ही रंग रूप है”, शमशाद बेग़म और साथियों का गाया “अपने बाबुल का घर छोड़ के बेटी” और मुबारक बेग़म की आवाज़ में “ख़ात्मा दिल ख़ैर अपना हो चुका” जैसे गीत शामिल हैं।
इस फ़िल्म में कुल कितने गाने थे इस पर विभिन्न स्रोतों अलग-अलग जानकारी मिलती है। कुछ स्रोतों के अनुसार गीता दत्त और आशा भोंसले ने फ़िल्म में तीन-तीन एकल गीत गाए थे जबकि संगीत उपलब्ध करवाने वाले मंचों पर उपलब्ध गीतों की संख्या अलग है। संभवतः यह भी समय बीतने के साथ संगीत को सुरक्षित बचाकर रखने से जुड़ी विसंगतियों का नतीजा है।
जहाँ तक इस फ़िल्म की व्यावसायिक कामयाबी का सवाल है तो इसके बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं मिलती है। फ़िल्म से जुड़ी कुछ रपटें ऐसा कहती हैं कि इस फ़िल्म के निर्माण के दौरान पृथ्वीराज कपूर की आवाज़ चली गई थी, जिसके कारण उन्होंने रंगमंच और फ़िल्मों दोनों से कुछ हद तक दूरी बना ली थी। लेकिन ठोस रूप से इसे लेकर कोई सूचना नहीं मिलती। इस फ़िल्म की रिलीज़ वाले वर्ष गुरु दत्त की चर्चित फ़िल्म प्यासा (1957) भी रिलीज़ हुई थी। गुरु दत्त की प्यासा को आज भी समाज के दोहरे बर्ताव पर उसकी कठोर टिप्पणी और वृहत सांस्कृतिक प्रभाव के लिए याद किया जाता है। इसकी तुलना में पैसा कम चर्चित रही। लेकिन विषयवस्तु की दृष्टि से यह एक रेखांकित करने योग्य फ़िल्म मानी जा सकती है, जिसे पृथ्वीराज कपूर के सिनेमाई करियर में एक उल्लेखनीय अध्याय के बतौर गिना जायेगा।
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